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मैया नहीं तो जीवन नहीं

Posted On: 14 Mar, 2013 में

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अपनी यमुना मैया को वापस मांगने हजारों यमुना भक्त राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। वे हर हाल में अपनी मैया को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा तक ले जाने के लिए दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली में प्रवेश कर 11 मार्च से जंतर मंतर पर धरना शुरू होगा। यमुना मुक्ति पदयात्रा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास। आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर इन्होंने दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता राजू सजवान से विस्तृत बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश:


यमुना की दशा पूरे देश के लिए चिंतनीय है, फिर मथुरा ही आंदोलन का सूत्रधार क्यों?

पूरे देश के लिए यमुना एक नदी हो सकती है, लेकिन मथुरावासी के लिए यमुना जीवन है। मथुरावासियों ने हमेशा मथुरा के साथ जीवन जिया है, लेकिन अब वे अपनी यमुना मैया को मरते हुए देख रहे हैं तो क्या उनमें बेचैनी नहीं होगी? उन्हें लग रहा है कि यमुना के साथ साथ वे भी मर रहे हैं, वे जानते हैं कि यमुना नहीं बची तो उनकी आने वाली पीढ़ी भी नहीं बचेगी। बस, इसीलिए वे निकल पड़े हैं, दिल्ली में बैठे हुक्मरानों से अपनी यमुना वापस मांगने …।


जहरीली यमुना मथुरा को कैसे प्रभावित कर रही हैं?

यमुना के प्रति मथुरावासियों का लगाव इतना है कि वे इनके बिना जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकते। दिल्ली से निकलते ही यमुना जहरीली होती जा रही है। मथुरा पहुंच कर यह जहरीला पानी भूजल को भी प्रभावित कर रहा है और हालात नहीं सुधरे तो मथुरा व आसपास के इलाकों का पीने का पानी भी जहरीला हो जाएगा। जब पानी ही नहीं मिलेगा तो जीवन कैसे बचेगा?


आंदोलन में देश के दूसरे हिस्से के लोग शामिल नहीं हैं?

बिल्कुल शामिल हैं। इस आंदोलन में गुजरात, दक्षिण भारत, उत्तर प्रदेश के उन इलाकों के लोग भी शामिल हैं, जिनके यहां से यमुना नहीं गुजरती, लेकिन उनके मन में यमुना के प्रति आस्था है। वे लोग मथुरा आते हैं, यमुना में नहाने, आचमन करने लेकिन मथुरा में यमुना की दशा ऐसी हो गई है कि वहां खड़ा तक नहीं रहा जा सकता, पानी को पीना या नहाना तो दूर की बात है। यमुना की दशा देखकर उनकी आंखें भर आती हैं। फिर हम जहां से गुजर रहे हैं, वहां के लोग इसमें शामिल होते जा रहे हैं, क्योंकि हमारे देश में नदियों के प्रति आस्था का भाव है।

कुछ राजनीतिक लोग इस मुद्दे को धार्मिक रंग देना चाहते हैं?

हां, वे लोग हमारी ताकत कम करना चाहते हैं, लेकिन धर्म जीवन से ऊपर है और यहां जीवन के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है। नदी या पानी हर धर्म के लोगों को चाहिए, इसलिए इस लड़ाई में सभी धर्म के लोग शामिल हैं और हमारे साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल रहे हैं।


क्या यमुना को मथुरा तक जीवित करना आसान लगता है?

बिल्कुल आसान सा काम है। हमारी दोनों मांगें पूरी करना बेहद आसान है। हथिनी कुंड से यमुना का पानी छूटते ही मैया जी (यमुना) अपने पुराने स्वरूप में लौट आएंगी। मैया जी को हथिनी कुंड बैराज पर बंधक बना कर रखा गया है। हमारी दूसरी मांग है कि दिल्ली यमुना के दोनों ओर नाले बनाए और अपना गंदा पानी उन नालों में डाले, आगे आकर इस पानी को ट्रीट करके नहरों में डाला जाए, ना कि यमुना में। बस इतना भर करके ही हमारी मैया हमें लौटाई जा सकती है।

………………..


दीन दशा के लिए हम सब अपराधी


गांधीवादी चिंतक और कालजयी पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ के लेखक पेयजल की व्यवस्था अन्यत्र से कर लेने वालीे दिल्ली को यमुना में कचरा डालने में शर्म नहीं आती है। यमुना का संकट पुराना है, इसका हल करने की दिशा में अनेक सरकारी और गैर सरकारी प्रयास हो चुके हैं। दिल्ली के मल-मूत्र को साफ करने में दिल्लीवालों और उनकी सरकारों ने कई करोड़ों रुपये भी बहाकर देख लिया है। यमुना अभी तक साफ नहीं हो पाई है।


दिल्ली शहर इसमें सारी गंदगी डालकर बेफिक्र सोता रहा। उसकी प्यास बुझाने के लिए यमुना से जितना पानी निचोड़ा जा सकता था, निचोड़ गया। कम पड़ा तो गंगा को सचमुच उल्टा बहाकर दिल्ली तक भी लाया जा चुका है। वह भी कम पड़ा तो टिहरी से भागीरथी का पानी भी दिल्ली आ चुका है। अब भी जब उसकी प्यास नहीं बुझ पायी तो हिमाचल की रेणुका झील से भी पानी यहां पर लाने की योजना बन चुकी है। कुल मिलाकर दिल्ली कहीं न कहीं से पीने के लिए पानी जुटा लेती है, इसलिए उसे अपनी सारी गंदगी यमुना में डालते समय कोई शर्म नहीं आती। दिल्ली बिना सोचे-समझे अपने आगे के शहरों के साथ जो अत्याचार कर रही है। उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता।

दिल्लीवालों को उनका अपराध बताने के लिए मथुरा, ब्रज, आगरा, वृंदावन के लोग दिल्ली की ओर चल पड़े हैं। बेहद गंदी कर दी गई यमुना कैसे इन शहरों पर मुसीबत बनकर आ सकती है इसे दिल्ली वाले समझ नहीं पाए हैं। आज यह अभियान दिल्ली को उसके जल अपराधों की सूची सौंपेगा तो यह बड़ा काम होगा। इस अपराध को बताने वाला यह आंदोलन चालू राजनीति, नारे बाजी में न बहे तो इसके परिणाम अच्छे निकलेंगे।


पौराणिक किस्सा है। एक बार यमुना विषैले सांप के कारण जहरीली बन गई थी तब इसी क्षेत्र के निवासियों ने युगपुरुष श्रीकृष्ण को यमुना में उतारकर संकट से छुटकारा पाया था। आज यमुना वृंदावन मथुरा में दिल्ली के विषैले स्वभाव के कारण विषैली बनी है। इसलिए इस विषैले स्वभाव का जहर हटाने के लिए बहुत जिम्मेदारी, प्यार और  स्नेह के साथ आंदोलन करना होगा।


Tags: yamuna bachao andolan, revolution, river revolution, गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरी, आंदोलन, राज्यादेश



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