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नए डिलीवरी सिस्टम के पेंच

Posted On: 19 Oct, 2011 Others में

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जरूरतमंदों के सीधे बैंक खातों तक नकद लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया में कई पेंच हैं। चार चरण वाली इस नकद हस्तांतरण प्रक्रिया में विभिन्न एजेंसियों के बीच भ्रम की स्थिति है। लोगों की पहचान करने, उनका बैंक खाता खुलवाने, रकम भुगतान करने और खाते से लेन-देन शुरू करने को लेकर इनके बीच कई पेंच हैं।


whoलाभार्थियों की सही पहचान करना..

चरण 1 [पहचान]

कौन कर रहा है?

यूआइडी द्वारा 20 करोड़ लोगों की पहचान की जानी है। शेष 100 करोड़ लोगों का विवरण एनपीआर (नेशनल पापुलेशन रजिस्टर) तैयार करेगा।

क्या है पेंच?

यूआइडी सभी की पहचान 2017 तक अकेले करना चाहता है। इस प्रक्रिया की लागत 17 हजार करोड़ रुपये है। ऐसी ही कुछ एनपीआर की भी है। इससे दोहरा खर्च उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा 2017 तक इंतजार करने का ख्याल छोड़ कुछ मंत्रालय और राज्य अपना खुद का बायोमेट्रिक्स (विशेष पहचान) कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं।


accessचरण 2 [पहुंच]

लाभार्थियों को बैंक खाता या इसके समतुल्य दूसरी सुविधा मुहैया कराना।

कौन कर रहा है?

भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को जीरो बैलेंस वाले नो फ्रिल अकाउंट (विशेष बचत खाते) खोलने के निर्देश दिए। इस दिशा में कुछ खाते खोले भी जा चुके हैं। टेलीकॉम और पेमेंट कार्ड कंपनियां इसके वैकल्पिक रास्ते की वकालत कर रही हैं।

क्या है पेंच?

व्यावहारिक न होने के चलते ऐसे खाते खोलने में सभी बैंक रुचि नहीं ले रहे हैं जबकि आरबीआइ वैकल्पिक माध्यमों पर उत्सुकता नहीं दिखा रहा है।


banking_cash_185593_tnbचरण 3 [भुगतान]

लाभार्थियों की पहचान की पुष्टि करके रकम उनके खातों में डालना

कौन कर रहा है?

यूआइडीएआइ इन दोनों कार्यो के लिए सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। इस सॉफ्टवेयर से सभी बैंकों को आपस में जोड़ा जा सकेगा। इसके तहत काम शुरू हो चुका है।

क्या है पेंच?

लाभार्थियों के लिए बैंकों द्वारा खोले गए इन विशेष खातों की देखभाल बैंकिंग कॉरेसपांडेंट (बीसी) फर्म द्वारा की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया और तंत्र से बैंक का सीधा जुड़ाव नहीं रहेगा। ऐसे में कोई कैसे दावा कर सकता है कि सही व्यक्ति को ही भुगतान किया गया है।


arrowचरण 4 [लेन-देन]

लाभार्थियों को उनके खातों से लेन-देन करने में सक्षम बनाना।

कौन कर रहा है?

अभी मुख्य रूप से बीसी फर्म ही इस काम को कर रही हैं। हालांकि टेलीकॉम कंपनियां और पेमेंट कार्ड कंपनियां भी आना चाह रही हैं।

क्या है पेंच?

एक गांव का एक ही बीसी एजेंट होगा। इससे फायदा कम नुकसान की आशंका ज्यादा है। ग्रामीणों को अपना बीसी चुनने का विकल्प नहीं है। यूआइडीएआइ एक नई प्रणाली चाहती है जिसके तहत कोई भी ग्रामीण किसी भी एजेंट, बीसी या बैंक के माध्यम से अपने खाते में लेन-देन करने में सक्षम हो।


16 अक्टूबर को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “गांवों में बैंकों की कहानी”  पढ़ने के लिए क्लिक करें.

16 अक्टूबर को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “ऐसे में कैसे होगा गरीबों का कल्याण!”  पढ़ने के लिए क्लिक करें.

16 अक्टूबर को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “पहचान के खेल में तेजी से बढ़ रहे हैं खिलाड़ी”  पढ़ने के लिए क्लिक करें.


साभार : दैनिक जागरण 16 अक्टूबर 2011 (रविवार)

नोट – मुद्दा से संबद्ध आलेख दैनिक जागरण के सभी संस्करणों में हर रविवार को प्रकाशित किए जाते हैं.



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