blogid : 4582 postid : 984

तेज विकास और महंगाई में सीधा संबंध

Posted On: 10 Aug, 2011 बिज़नेस कोच में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

महंगाई के लिए सरकार अक्सर तर्क देती दिखती है कि तेज आर्थिक विकास में ऐसा ही होता है। जबकि अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ें कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। इन आंकड़ों के अनुसार तेज विकास और मुद्रास्फीति में कोई सीधा संबंध नहीं है।


विकासशील एशियाई देश

1980-84 1985-89 1990-94 1995-99 2000-04 2005-09
विकास दर 6.5 7.0 7.7 6.7 7.2 9.2
मुद्रा-स्फीति

8.3 10.9 9.8 7.4 2.7 4.8

चीन

1980-84 1985-89 1990-94 1995-99 2000-04 2005-09
विकास दर 9.7 9.9 10.9 9.1 9.2 11.4
मुद्रा-स्फीति 2.9 12.0 10.3 5.2 1.1 2.7

भारत

1980-84 1985-89 1990-94 1995-99 2000-04 2005-09
विकास दर 5.0 5.8 4.7 6.8 5.6 8.2
मुद्रा-स्फीति 10.5 7.7 10.2 8.9 3.9 7.2

ब्राजील

1980-84 1985-89 1990-94 1995-99 2000-04 2005-09
विकास दर 1.5 4.5 1.4 2.0 3.0 3.6
मुद्रा-स्फीति 123.9 532.3 1690.2 19.4 8.7 5.1

रूस

1980-84 1985-89 1990-94 1995-99 2000-04 2005-09
विकास दर -4.3 -1.1 6.9 4.1
मुद्रा-स्फीति 236.5 74.7 16.5 11.4

*जीडीपी सभी आंकड़ें फीसदी में स्नोत: व‌र्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक डाटाबेस, अक्टूबर 2010


जनमत


chart-1क्या तेज आर्थिक विकास के बावजूद आम आदमी की हालत दिनोंदिन खराब हो रही है?


हां : 97%

नहीं : 3%



chart-2क्या महंगाई, बेरोजगारी जैसी आर्थिक समस्याओं के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं?


हां : 95%

नहीं : 5%



आपकी आवाज

आर्थिक विकास के बावजूद इतनी अधिक महंगाई में आम जनता के लिए गुजारा करना मुश्किल है. -प्रसन्नजीत@याहू.कॉम


भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था के चलते तेज आर्थिक विकास आम आदमी के लिए अभिशाप बन चुका है. -गौरीशंकर1054@रीडिफमेल.कॉम


तमाम आर्थिक समस्याओं के लिए सौ फीसदी सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। आर्थिक विकास का फायदा सिर्फ अमीरों को हो रहा है। आम आदमी तो महंगाई के दलदल में धंसता जा रहा है. -राजू09023693142@जीमेल.कॉम


07 अगस्त को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “थमने न पाए आर्थिक सुधारों का पहिया” पढ़ने के लिए क्लिक करें.

07 अगस्त को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “ढलान पर विकास” पढ़ने के लिए क्लिक करें.

07 अगस्त को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “अर्थव्यवस्था की सुस्ती !” पढ़ने के लिए क्लिक करें.


साभार : दैनिक जागरण 31 जुलाई 2011 (रविवार)

नोट – मुद्दा से संबद्ध आलेख दैनिक जागरण के सभी संस्करणों में हर रविवार को प्रकाशित किए जाते हैं.



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sakshi के द्वारा
August 11, 2011

महगाई और गरीबी के बीच की लकीर को आकडों के सहारे दिखाने की बेहतरीन कोशिश है यह. बहुत बढ़िया,


topic of the week



latest from jagran