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आतंक के खात्मे के लिए सरकार के दावों का सच

Posted On: 18 Jul, 2011 Others में

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26/11 आतंकी हमले के बाद आतंकवादी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने कई घोषणाएं की थीं। उनकी वर्तमान स्थिति पर एक नजर :


yp_india_parlimentदेश के लिए :

नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर

इस खुफिया एजेंसी का गठन 2010 तक किया जाना था.

स्थिति: अभी तक कहीं दिखाई नहीं दी.


मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी)

आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी करना.

स्थिति: सक्रिय, आतंकी चेतावनी जारी करती है लेकिन इसकी अधिकांश चेतावनी गलत साबित होती है .


नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड (नेटग्रिड)

बैंक, रेलवे और इमीग्रेशन समेत 21 स्थानों के डाटाबेस का एक नेटवर्क इस साल के अंत तक स्थापित करने की योजना थी .

स्थिति: लक्ष्य से दूर.


राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए)

आतंकी मामलों की जांच के लिए गठन.

स्थिति: सक्रिय, लेकिन अभी तक सीमित सफलता ही मिली.


गृह मंत्री की रोज बैठक

रोज दोपहर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह सचिव, रॉ एवं आइबी प्रमुखों के साथ गृह मंत्री की बैठक .

स्थिति: मीटिंग लगातार जारी.


विदेशियों का रजिस्ट्रेशन एवं ट्रैकिंग

भारतीय दूतावासों, इमीग्रेशन कार्यालय और सेंट्रल फॉरनर ब्यूरो के आपसी समन्वय से विदेशियों की वीजा से लेकर आवाजाही पर नजर रखने का प्रस्ताव .

स्थिति: कार्य प्रगति में.


राष्ट्रीय सुरक्षा दस्ते (एनएसजी)

बड़े शहरों में एनएसजी केंद्र की स्थापना.

स्थिति: मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में हब बनाया गया है। भोपाल में हब बनाया जाना अभी बाकी है.


समुद्री सुरक्षा सलाहकार

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की तर्ज पर एक सलाहकार की नियुक्ति का प्रस्ताव .

स्थिति: अधर में.


नौकाओं का रजिस्ट्रेशन

भारतीय जल सीमा के भीतर की सारी नौकाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य.

स्थिति: काम अधूरा.


मछुआरों के लिए पहचान-पत्र

तट सीमा में अजनबियों के प्रवेश को रोकने के लिए सभी मछुआरों को पहचान पत्र दिया जाएगा.

स्थिति: अधिकांश राज्यों में अधूरा .


संयुक्त ऑपरेशन केंद्र की स्थापना

तटीय बल, नौसेना और समुद्री पुलिस, कस्टम और इंटेलीजेंस ब्यूरो के बीच तालमेल स्थापित किया जाएगा.

स्थिति: नौसेना ने मुंबई, कोच्चि, विशाखापत्तनम और पोर्ट ब्लेयर में केंद्र स्थापित किए.


सागर प्रहरी बल

नौसेना के अधीन तटीय सुरक्षा के लिए एक नए विशेष दस्ते का गठन किया जाएगा.

स्थिति: पहला बैच तैयार.


तटीय दस्तों का आधुनिकीकरण

नई नौकाओं, एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर को तटीय दस्ते में शामिल करना.

स्थिति: कार्य प्रगति पर.


groundमुंबई के लिए :


आतंकवाद-निरोधी दस्ते और खुफिया व्यवस्था में सुधार .

स्थिति: अंदरूनी खींचतान की वजह से एटीएस 50 प्रतिशत स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार आतंकियों को अपराधियों से अलग रखने के कारण खुफिया जानकारियां नहीं मिल पा रही है.


सीसीटीवी कैमरे  की व्यवस्था

स्थिति: इसकी व्यावहारिक रिपोर्ट और बजट पास करने में ही राज्य सरकार को दो साल लग गए। पिछले महीने राज्य सरकार ने 5000 क्लोज सर्किट कैमरे लगाने की सहमति दी है.


राज्य सुरक्षा परिषद की स्थापना

स्थिति: मुंबई शहर की सुरक्षा और समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले 66 सदस्यीय इस परिषद में विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर लोगों को शामिल किया गया। आज तक केवल दो बैठकें ही हुई हैं .


सुरक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण और समीक्षा के लिए मंत्रियों की एक समिति का गठन

स्थिति: गृह मंत्रालय के अधीन इस समिति को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर नजर रखने के लिए नियमित तौर पर प्रत्येक सप्ताह बैठक करनी थी। लेकिन पिछले एक साल से साप्ताहिक समीक्षा नहीं की जा रही है .


विशेष दस्ते की स्थापना

स्थिति: सरकार ने फोर्स-1 नामक एक विशेष दस्ते का गठन किया था। इसमें 352 कमांडो को शामिल करने का लक्ष्य था। अभी तक 220 कमांडो को प्रशिक्षित किया गया है .


पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण

स्थिति: राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय और पुलिस का बजट बढ़ाया है। लेकिन आधुनिकीकरण के लिए जरूरी सामान खरीदने की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि पुलिस के पास कुशल श्रम शक्ति का अभाव है.


जनमत


chart-2क्या मुबंई पर एक और आंतकी हमला पुलिस-खुफिया तंत्र की नाकामी  है?



हां : 93  %

नहीं : 7 %



chart-2क्या माफिया-पुलिस-राजनीति गठजोड़ के चलते मुबंई आसान आतंकी निशाना है?


हां : 95 %

नहीं : 5 %


आपकी आवाज


बड़ी समस्या बन चुका आतंकवाद पुलिस और खुफिया तंत्र के साथ सरकार की नीतियों के नकारेपन को दर्शाता है. – माई फ्रेंड वीरु@ गीमेल डॉट कॉम


यह हमला हमारी कांग्रेस सरकार की नाकामी है. हमारी सरकार को पाकिस्तान में अमेरिका जैसी कार्यवाही करनी चाहिए. – बृजेंद्र राठौड़


अंडरवर्ल्ड-पुलिस-राजनीति के गठजोड़ से मुबंई आतंकियों का आसान निशाना बन रही हैं. – अखिलेश (फैजाबाद)



17 जुलाई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “सुरक्षा का आधारभूत ढांचा मजबूत करना जरूरी” पढ़ने के लिए क्लिक करें.


17 जुलाई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “नहीं भाती किसी की खुशहाली” पढ़ने के लिए क्लिक करें.


17 जुलाई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “जब जब दहली मुंबई” पढ़ने के लिए क्लिक करें.


साभार : दैनिक जागरण 17 जुलाई 2011 (रविवार)


नोट – मुद्दा से संबद्ध आलेख दैनिक जागरण के सभी संस्करणों में हर रविवार को प्रकाशित किए जाते हैं.




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