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जनमत : जल सकंट देश की कहानी

Posted On: 31 May, 2011 Others में

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क्या जल संरक्षणों के कानूनों को लागू करने में राज्य सरकारें गंभीर है?


हां : 84%


नहीं : 16


pai chart-2क्या जल संरक्षण को लेकर स्थानीय एजेंसिया और निकायों की भूमिका केवल सरकारी रस्म की अदायगी की तरह ही है?


हां : 75%

नहीं : 25%


आपकी आवाज :


जल संरक्षणों के कानूनों को लागू करने में राज्य सरकारों ने उदासीनता बरती है. – प्रमोद कुमार (देहरादून)


जल संरक्षण की मुहिम में स्थानीय एजेंसिया और निकायों की भूमिका केवल सरकारी रस्म की अदायगी की तरह ही है. – हरीश चतुर्वेदी (इंदिरा नगर, बांद्रा).


29 मई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “कहां गया पानी!” पढ़ने के लिए क्लिक करें.

29 मई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “जल संकट: देश की कहानी” पढ़ने के लिए क्लिक करें.

29 मई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “थोड़ा है स्वच्छ जल” पढ़ने के लिए क्लिक करें.

29 मई को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “प्रदेशों की परेशानी” पढ़ने के लिए क्लिक करें.


साभार : दैनिक जागरण 29 मई 2011 (रविवार)

नोट – मुद्दा से संबद्ध आलेख दैनिक जागरण के सभी संस्करणों में हर रविवार को प्रकाशित किए जाते हैं.

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kaylynn के द्वारा
July 12, 2016

Non mais un crédit qui coûte 40% du prix final, on appelle ça une escroquerie dans le monde normal….A croire que ça vous plait que vos lecteurs se fassent avoir par de tels voleurs.Comme dit plus haut, des tas d’enseignes ou simples revendeurs (comme Grosbill pour ne pas les citer) proposent aussi des solutions de crédit et permettent de l’acheter pour un surcoût de 50 ou 100€ &lepno;&ubsq;seulemant »


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