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बिन पानी सब सून

Posted On: 26 Apr, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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बिहार

 

• कुल जल स्नोतों की संख्या – (आहर, तालाब) 20,938
• राज्य का रकबा – 94,163 वर्ग किमी
• कार्यरत जल स्नोतों की संख्या – 17683
• सतह पर मौजूद जल – 34053 घन किमी

सरकारी प्रयास

• मौर्य काल 327-297 ई.पू. में निर्मित सिंचाई स्नोत आहर, पइन व तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना शुरू.
• नदी जोड़ योजना पर काम जारी.

 

उत्तराखंड

उत्तराखंड हिमालय को एशिया का जल स्तंभ कहा जाता है। उत्तराखंड से बारह बड़ी नदियां और उनकी कई सहायक नदियां निकलती हैं। राज्य में औसतन 1200 मिमी बारिश होती है। ज्यादातर बारिश मध्य जून से मध्य सितंबर तक होती है। मानसून के दौरान नदियों का जल स्तर कई गुना बढ़ जाता है।

उत्तराखंड में कुल 22707 प्राकृतिक जल स्नोत हैं। यहां एक दशक में प्राकृतिक पेयजल स्नोतों की मात्रा में औसतन पचास प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

सरकारी प्रयास

• सतह पर मौजूद जल निकायों के संरक्षण के लिए वनीकरण
• रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए जल स्नोतों को रिचार्ज करने का प्रयास

 

जम्मू-कश्मीर

 

• जल निकायों की संख्या – 1248
• जल निकायों का रकबा – 291.07 वर्ग किमी
• राज्य का रकबा – 2,22,236 वर्ग किमी
• एक दशक पहले जल निकायों की संख्या – 38 (वर्ष 1998 में)
• सतह पर उपलब्ध जल की वर्तमान मात्रा – 2.70 बीसीएम (बिलियन क्यूसेक मीटर)
• सिंचाई के लिए उपयोग किए जा रहे सतह पर मौजूद पानी की हिस्सेदारी – 25 प्रतिशत
• सतह पर मौजूद जल में हर साल औसतन बारिश से होने वाली वृद्धि – 998 मिमी

सरकारी प्रयास

सतह पर मौजूद जल व जल निकायों के संरक्षण के लिए फरवरी 2011 में वाटर रिसोर्सेस एक्ट लागू किया है। एक्ट के मुताबिक सरकार पनबिजली परियोजनाओं से भी पानी का किराया वसूलेगी। पानी के किराए को दोगुना करने के साथ पानी के मीटर लगाने की भी तैयारी है ताकि लोग जरूरत के मुताबिक ही पानी का इस्तेमाल करें।

 

पश्चिम बंगाल

 

• कुल जल स्नोतों की संख्या – (आहर, पइन व तालाब) 5.45 लाख
• राज्य का रकबा – 88752 वर्ग किमी
• कार्यरत जल स्नोतों की संख्या – 2.93 लाख
• धरती पर मौजूद जल की उपलब्धता – 13.29 (एमएचएएम) मिलियन हेक्टेयर मीटर
• कुल रकबे की तुलना में निकायों का क्षेत्रफल – 43 फीसदी
• सतह पर उपलब्ध जल की मात्रा – 27.46 बीसीएम

सरकारी प्रयास

• सदियों पुराने तालाब, झील, तड़ाग और अन्य जल स्नोतों को पुनर्जीवित करने की योजना की शुरुआत.
• वर्षा के जल को संरक्षित करने का भी कार्य चल रहा है.

 

उत्तर प्रदेश

 

• कुल जल निकाय – 84,647
• जल निकायों से घिरा रकबा – 73053 हेक्टेयर
• राज्य का रकबा – 240.928 लाख हेक्टेयर
• एक दशक पहले मौजूद जल निकाय – 84,647
• एक दशक पहले सतह पर मौजूद जल की मात्रा – 12.21 मिलियन हेक्टेयर मीटर
• सतह पर उपलब्ध जल की वर्तमान मात्रा – 12.21 मिलियन हेक्टेयर मीटर
• सिंचाई के लिए उपयोग में लाए जा रहे सतह पर मौजूद पानी की मात्रा या हिस्सेदारी – 7.8 मिलियन हेक्टेयर मीटर
• प्रदेश में औसतन 235.4 लाख हेक्टेयर मीटर पानी की सालाना बारिश

सरकारी प्रयास

• हर 52 ग्रामसभाओं के बीच कम से कम एक तालाब बनना है या मौजूद तालाब का जीर्णोद्धार होना है.

 

हिमाचल प्रदेश

 

• जल निकायों की संख्या – 7,495
• राज्य का रकबा – 55673 वर्ग किमी
• कुल रकबे की तुलना में जल निकायों का क्षेत्रफल – 35 फीसदी
• एक दशक पहले जल निकाय – 5,779
• सतह पर उपलब्ध जल की वर्तमान मात्रा में कमी – 20 फीसदी
• सिंचाई के लिए उपयोग लाए जा रहे सतह पर मौजूद पानी की मात्रा – 23507 एमसीएम
• सालाना औसतन बारिश – 1300 मिमी

सरकारी प्रयास

• वाटर मैनेजमेंट बोर्ड के तहत रेन हार्वेस्टिंग स्कीम, वन, आइपीएच तथा ग्रामीण विकास विभाग काम कर रहे हैं।
• नई जल नीति में पनबिजली परियोजनाओं के लिए कम से कम 15 फीसदी पानी छोडऩे की अनिवार्यता का प्रावधान

 

झारखंड

 

• कुल जल निकायों की संख्या – सरकारी 15746, निजी तालाब 85849, कुल 101595
• पूरे राज्य का रकबा – 79714 वर्ग किमी
• कुल रकबे की तुलना में जल निकायों का क्षेत्र – करीब 5 फीसदी
• सतह पर उपलब्ध जल की वर्तमान मात्रा – 237890 लाख घनमीटर
• सिंचाई के लिए उपयोग में लाए जा रहे सतह पर मौजूद पानी की हिस्सेदारी -17 फीसदी
• 39,640 लाख क्यूबिक मी. सतह पर मौजूद पानी का उपयोग सिंचाई के लिए हो रहा है
• हर साल औसतन बारिश – 1100 मिमी से 1200 मिमी

सरकारी प्रयास

• डैम व तालाबों के गहरीकरण की योजना

देश में सतह पर मौजूद जल की स्थिति

• 14 प्रमुख नदियों, 44 मझोली नदियों और छोटी-छोटी धाराओं में सालाना 1645 थाउजेंड मिलियन क्यूबिक मीटर (टीएमसी) पानी बहता है
• हर साल 3816 टीएमसी पानी बारिश से प्राप्त होता है
• हिमालय क्षेत्र में स्थित 1500 ग्लेशियरों की कुल बर्फ का आयतन करीब 1400 घन किमी है
• जम्मू कश्मीर में डल और वुलर, आंध्र प्रदेश में कोलेरू, उड़ीसा में चिल्का और तमिलनाडु की पुलीकट जैसी कई बड़ी प्राकृतिक झीलें हैं.

24 अप्रैल को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “मर रहा है आंखों का पानी” पढ़ने के लिए क्लिक करें

24 अप्रैल को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “बाढ़-सूखे का इलाज है पाल-ताल-झाल” पढ़ने के लिए क्लिक करें

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24 अप्रैल को प्रकाशित मुद्दा से संबद्ध आलेख “जनमत – जल संकट” पढ़ने के लिए क्लिक करें

साभार : दैनिक जागरण 24 अप्रैल 2011 (रविवार)
नोट – मुद्दा से संबद्ध आलेख दैनिक जागरण के सभी संस्करणों में हर रविवार को प्रकाशित किए जाते हैं.

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